ग़ज़ल(निगाहों में...), दैनिक लेखनी प्रतियोगिता -14-Mar-2024
ग़ज़ल ( निगाहों में...)
#बह्र : 122 122 122 122
#काफ़िया : आया , रदीफ़ : हुआ है
#मिसरा :मगर हमनशीं वो पराया हुआ है l
निगाहों में बस वो समाया हुआ है,
मगर हमनशीं वो पराया हुआ है ।।१।।
न रहता हमारे निकट वो कभी भी।
दिलों में हमारे समाया हुआ है।।२।।
दुःखी मन सदा ही रखा वो करेगा।
जुल्मों का बहुत वो सताया हुआ है।।३।।
कभी ना दिखाई हमें दी निकटता।
नज़र से अलग ही हटाया हुआ है।।४।।
कभी भी किसी से कुछ नहीं बताता।
बहाना बनाना सिखाया हुआ है।।५।।
सदा ही चुप रहा करे वो सभी से।
दिलों में कुछ न कुछ बिठाया हुआ है।।६।।
घुट रहा दिलों में न जाने अभी तक।
दर्द को अभी तक दबाया हुआ है।।७।।
कभी की नहीं इज्ज़त मेरी उन्होंने।
इज्ज़त को हमेशा लुटाया हुआ है।।८।।
कला की परख है उसे तो हमेशा।
हुनर को सदा ही दिखाया हुआ है।।९।
मर्यादा रखी है सदा ही हमारी।
सदा ही रिश्तों को निभाया हुआ है।।१०।।
पता है मुझे राज़ तेरे सभी ही।
मुझे सब तुम्हीं ने बताया हुआ है।।११।।
मिले थे हम जब उनसे तो कहानी ।
तुम्हारी उन्होंने सुनाया हुआ है।।१२।।
~~~राजीव भारती
पटना बिहार (गृह नगर)
Mohammed urooj khan
15-Mar-2024 01:19 PM
👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾
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Gunjan Kamal
15-Mar-2024 11:55 AM
बहुत खूब
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Abhinav ji
15-Mar-2024 09:24 AM
Nice👍
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